प्यार और विश्वास: तलाक के लिए तैयार: फिर से साथ रहने की कहानी
मैं सुनील कुमार सिन्ह एक बार फिर श्री सन्तोष दूबे अर्थात् "पण्डित जी" की डायरी के एक पन्ने को आप सबके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। हो सकता मेरे इस छोटे से प्रयास से किसी का कुछ भला हो जाये।।।
अक्टूवर - 2023 का समय था। हरिद्वार में रहने वाले एक दम्पत्ति ने आपसी तकरार के बाद तलाक के लिए अदालत में अर्जी लगा दी। अदालत नें अर्जी स्वीकार कर ली और दोनों पक्षों की सुनने के बाद तलाक के लिए कुछ महीने का समय दे दिया।
तभी किसी के कहने पर दोनों के माता - पिता एक साथ पण्डित जी से मिलने आये।
दोनों के परिवार वाले नहीं चाहते थे कि तलाक हो।
लेकिन क्या करें। दोनों परिवार के लोग मजबूर थे। पति - पत्नी किसी की सुनने को तैयार ही नहीं थे। उन्हें तो सिर्फ तलाक ही चाहिये था। तलाक ही अब उनका सुकून था। अमन-ओ-चैन था।
समय कम था और समस्या विकट थी। एक परिवार बिखर रहा था। रात की नींद और दिन का चैन सब गायब था। कोई भी सुनने को तैयार नहीं था।
अब उन दोनों के माता-पिता की आखिरी उम्मीद पण्डित जी पर ही आकर टिक गई थी। पण्डित जी ही कुछ कर सकते हैं ऐसा उनका मानना था। लोग पण्डित जी से चमत्कार की उम्मीद लगा बैठे थे। मैं भी किसी चमत्कार की आस में बैठा था और सोंच रहा था कि कास पण्डित जी कोई चमत्कार करते और मुझे भी कुछ दिव्य सीखने को मिलता।
लेकिन हाय रे मेरी फूटी किस्मत !!!! पण्डित जी ने किसी भी किस्म के चमत्कार को करने से मना कर दिया और सिर्फ फैमिली काउंसेलिंग को करने को कहा। और साफ - साफ कहा कि किसी चमत्कार या पूजा-पाठ की जरूरत नहीं है। किसी और अन्धविश्वास की भी जरूरत नहीं है। सिर्फ फैमिली काउंसेलिंग की ही जरूरत है।
आखिर में अपने बहुत व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर पण्डित जी ने उन्हें दिया और कहा कि दो दिन के बाद आना और साथ में दोनों बच्चों को भी लेकर आना। साथ ही अगर हो सके तो दोनों पति और पत्नी के बच्चों और भाई-बहनों को भी लेते आना। यात्रा में खर्च तो जरूर होगा लेकिन ईश्वर ने चाहा तो सब ठीक होगा।
फिर लोग वापस चले गये। और दो दिन के बाद वह प्रतीक्षित दिन भी आ गया जिसकी कि सबको बेसब्री से इंतजार था। दोनों पक्षों के लोग जिनमें दोनों परिवार के 5 लड़के, 6 लड़कियाँ, और दोनों के माता - पिता तथा चाचा लोग सुबह तड़के ही आ गये। मैनें सबको बैठाया और जालपान करवाया।
करीब तीन घन्टे बाद पण्डित जी आये और सबसे मुलाकात की। फिर फैमिली काउंसेलिंग के लिए सबको एक साथ मीटिंग स्थल पर लाया गया ।
फिर पण्डित जी ने कंप्यूटर पर कुछ देखा और अभी थोड़ा इंतजार करने को कहा। लोगों ने कहा कि पण्डित जी जरा जल्दी कर देते क्योंकि हमें दूर जाना है। तब मुझे पता चला कि पण्डित जी ने क्या देखा था कम्प्यूटर पर।
पण्डित जी ने चन्द्रमा की शुभ स्तिथि का इंतजार किया था कम्प्यूटर पर।
फिर करीब पौने एक घन्टे और इंतजार के बाद पण्डित जी ने पति और पत्नी दोनों को अपने ऑफिस में बुलाया। दोनों से एक साथ और अलग-अलग भी बातचीत किया। इस सब में करीब एक घन्टा और खर्च हो गया।
इसके बाद दोनों परिवार के सभी लोगों के सामने भी पण्डित जी ने पति और पत्नी दोनों को सलाह और मशवरा दिया।
इस सबके दौरान पण्डित जी, पति-पत्नी और सभी लोगों के बीच कोई अवरोधक नहीं था अर्थात् सब कुछ सबके सामने ही हो रहा था। क्योंकि पण्डित जी का सिद्धांत है कि वे किसी महिला से अकेले में या किसी कमरे में कोई बातचीत नहीं करते।
अब आया अन्तिम पड़ाव। करीब आधा घंटा और बीत गया। आखिर में दोनों पति और पत्नी ने आपस में अपनी गलती स्वीकार कर ली।
इसके बाद सब लोग खुशी - खुशी घर वापस लौट गये।
रह गया सिर्फ मैं और वह भी चमत्कार देखने की इच्छा अपने दिल में लिए हुए।
खैर !!!!!!!!!!
पण्डित जी ने कुछ तो किया था। शायद किसी मंत्र का जाप। फिर हवा में अपने दोनों हाँथ घुमाकर दोनों पति-पत्नी के सिर पर रखा था।
और तभी हुआ था कोई चमत्कार। आखिर जब लोग एक साथ रहने को तैयार ही नहीं थे फिर कैसे अचानक से हो गए राजी यानि कि एकदम से तैयार।
कुछ आया आप लोगों के भी समझ में? क्या यह कोई चमत्कार नहीं है? लेकिन पण्डित जी कहते हैं की कोई चमत्कार नहीं है ये तो सिर्फ एक नमूना भर है मनोविज्ञान का।।।
खैर!!!!!!
अब जो भी कुछ था। था तो सिर्फ हमारे समझ का चक्कर।।।।।
आप पण्डित जी अर्थात् श्री सन्तोष दूबे जी से निम्नलिखित पते और मोबाइल नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं।।।।।
श्री सन्तोष दूबे "पण्डित जी"
( ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ )
( वैष्णव मंत्र, शिव-तंत्र, गायत्री एवं महाविद्या साधक )
(परामर्शदाता एवं सलाहकार) Counsellor and Consultant
(चिकित्सा, मनोविज्ञान, आध्यात्म, आध्यात्मिक चिकित्सा, नारायण योग, ज्योतिष, रत्न, वास्तु, परिवार एवं रिश्ते, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार एवं व्यवसाय, विवाह, टेक्नोलॉज़ी, मनोरोग, गुप्तरोग, योग एवं योगा, शरीर ऊर्जा, साधना एवं सिद्धियां, प्राण - ऊर्जा )
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