हमारे प्रश्न और पण्डित जी के उत्तर
मैं सुनील कुमार सिंह आज आप सबके सामने कुछ नया रखने जा रहा हूँ। अपनी जिज्ञासावश मैनें अपने मन में उठने वाले कुछ प्रश्नों के उत्तर पण्डित जी से प्राप्त करने के लिए उनके श्री चरणों में निवेदन किया। और उनके श्रीमुख से जो विनम्र उत्तर प्राप्त हुए वे यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।। शायद मेरे इस प्रयास से आम जनमानस का कुछ भला हो सके।।।
प्रश्न - 01 : पण्डित जी क्या आप कोई सिद्धि प्राप्त कर चुके हैं?
उत्तर - मैं कोई योगी नहीं हूँ। मैं तो सिर्फ साधना पथ का एक राही हूँ। और इस समय गायत्री तथा महाविद्याओँ की साधना कर रहा हूँ।
प्रश्न - 02 : पण्डित जी क्या आप बतायेंगें कि अभी तक आपने कितनी महाविद्याओं को सिद्ध कर चुके हैं।
उत्तर - अभी मैं पाँच महाविद्याओं की साधना पूरी करके छठी महाविद्या की साधना कर रहा हूँ। सिद्धि और असिद्धी की बात मुझे नहीं पता लेकिन मैं इन महाविद्याओं के बल पर लोगों का कुछ भला करने में जरूर समर्थ हुआ हूँ। और मानव समाज की यथासम्भव भलाई करना ही मेरा उद्देश्य है।
प्रश्न - 03 : क्या आप सिर्फ धनी लोगों की ही मदद करते हैं?
उत्तर : ऐसा नहीं है। मेरे और महाविद्याओं के लिए अमीर और गरीब सब एक जैसे हैं।
प्रश्न - 04 : पंडित जी हमने सुना है कि आप कभी-कभी लोगों को बिना उनकी कोई मदद किए ही वापस लौटा देते हैं।
उत्तर - क्या करुँ ! सवाल आध्यात्मिक शक्तियों और महाविद्याओं का है। जो लोग इस योग्य नहीं होते कि उनकी मदद किया जाए । उन्हें वापस लौटाना ही उचित होता है।
प्रश्न - 05 : आप कैसे पता लगाते हैं कि कोई व्यक्ति आपसे मदद पाने की योग्यता रखता है अथवा नहीं रखता है?
उत्तर - पहले तो यही कहना चाहूंगा कि महाविद्याओं से कुछ नहीं छिपा रहता। सब कुछ स्पष्टरूप में खुला रहता है। लेकिन मैं उनकी जरूरत, उनकी मजबूरी, उनकी इच्छा-शक्ति, उनके बातचीत करने के ढंग, उनकी सहनशक्ति, आध्यात्म और दैवीय शक्तियों और समाज के प्रति उनके विचार, उनके पापमय क्रियाकलाप इत्यादि का अध्ययन करने के बाद ही उनकी योग्यता अथवा अयोग्यता का निर्धारण करता हूँ। यही हमारे आध्यात्मिक गुरुओं ने निर्धारण किया है।
प्रश्न - 06 : सुना है कि आपने कई ऐसे लोगों को भी वापस लौटा दिया है जिनका कि समाज में काफी नाम है, रुतबा है, जो काफी ऊँचे पद पर आसीन हैं। जिनके पास काफी धन भी है। और तो और आपने कई उच्च शिक्षित शिक्षकों को भी वापस लौटा दिया है।
उत्तर - ठीक कहा आपने। लेकिन ये वो लोग हैं जिन्हें समाज संभ्रांत का दर्जा किसी लालच अथवा अपनी अल्प ज्ञान यानि कि अज्ञानता के कारण देता है। जबकि ये इस योग्य नहीं होते। मेरे पास कई ऐसे शिक्षक आये जो काफी मोटी तनख्वाह सरकार से लेते हैं लेकिन विद्यार्थियों को कुछ भी ज्ञान नहीं देते। उनके स्वयं की सन्तान भी अमर्यादित जीवन जी रही है। और तो और कुछ लोगों ने तो अपनी खुद की बेटी का घर उजाड़कर बेटी को घर बैठा लिया है वो भी सिर्फ अपने अहंकार की वजह से। कुछ लोगों ने दूसरे की सम्पत्ति हडप रखी है। अब अगर ये धनी हैं तो उससे मेरा क्या? मेरे लिए तो वे धर्महीन हुए । और जो धर्महीन हैं वे लोग चाहे जितने धनी हो जायें मैं उनकी कोई मदद आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा नहीं कर सकता। यह मेरे जैसे सभी साधकों की सीमारेखा है। लेकिन फिर भी अगर कोई महाविद्याओं की नजर में योग्य होता है तो उसकी योग्यता के अनुसार उसे मदद जरूर मिलती है।।
पण्डित जी अर्थात् श्री सन्तोष दूबे जी से आप निम्नलिखित पते और मोबाइल नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं।।।।।
श्री सन्तोष दूबे ( पण्डित जी )
( चिकित्सा, मनोविज्ञान, ज्योतिष, रत्न, वास्तु, साधना, आध्यात्म )
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