तंत्र क्या है ?
तंत्र अर्थात अपने शरीर , अन्य शरीर या मृत शरीर को मंत्रों और हठयोग द्वारा साधकर की जाने वाली तांत्रिक क्रियाएं। जो धैर्य प्राप्ति हेतु की जाए। अधिकतर इन का उद्देश्य शारीरिक-मानसिक रोग, अतृप्त आत्माओं से मुक्ति, ध्यान केंद्रित करना, सिद्धियां/विशेष शक्तियां प्राप्त करना होता है। सिद्धियों का प्रयोग सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही हो सकता है यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता हैं।
हमारे ऋषि मुनि संपूर्ण ब्रह्मांड की जानकारी रखते थे , उस का प्रमुख कारण यही था कि वह अपने स्थूल शरीर से सूक्ष्म शरीर को अलग करके संपूर्ण ब्रह्मांड में विचरण करने में सक्षम थे। ब्रह्मांड के सभी ग्रहों , उपग्रहों, उल्का पिंड व अन्य खगोलीय जानकारी इतनी विस्तृत रूप से जैसे रंग , प्रभाव , तापमान , परिक्रमा में समय यह किस प्रकार संभव हुआ होगा जबकि उपकरणों का अभाव था। तंत्र साधना या यंत्र साधना से ही संभव हो सकता हैं।
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