चमत्कार की तलाश में पण्डित जी से मिलने आये एक 50 वर्षीय विश्व विद्यालय प्रोफेसर
जुलाई - 2023, स्थान - जौनपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।
मैं सुनील कुमार सिंह आज फिर एक पत्र पण्डित जी की फाईल से लेकर आप सबके सामने उपस्थित हो रहा हूँ। कैसा जमाना आ गया है कि लोग खुद ही चमत्कार की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं और समय के साथ साथ अपना धन भी लुटा रहे हैं, ठगे भी जा रहे हैं, बर्बाद भी हो रहे हैं। स्वास्थ्य भी खराब कर रहे हैं। और बाद में चमत्कार करने वाले को खूब भर भर कर गालियां भी देते हैं। जाते खुद हैं चमत्कार की चाहत लेकर और गलत दूसरे को बोलते हैं।
अब देखिए इन प्रोफेसर साहब जी को ही। ये श्रीमान जी आये तो आये लेकिन आते ही पण्डित जी से बोल पड़े कि सुना है आपके पास कुछ चमत्कारी शक्तियाँ हैं इसिलिए आपसे मिलने आ गया वो भी 40 किलोमीटर की दूरी से। जौनपुर से बिलवाई आ गया। इस गर्मी में। अब आप बस मेरे सारे दु:ख और रोग दूर कर दो। पण्डित जी मुस्कुराकर रह गये। बोले कुछ नहीं। किया भी उनका कुछ नहीं । दोपहर के तीन बजे तक बैठाए रखा उनको। फिर बुलाया और कहा कि मैं चमत्कार नहीं दिखाता। चमत्कार तो ठग लोग करते हैं अथवा परम पिता परमेश्वर करते हैं । नीली छतरी वाला करता है। हमारे हनुमानजी करते हैं। इसलिये आप हमसे किसी चमत्कार की आशा न करें और कृपया अगर उचित समझें तो रोगों के उपचार हेतु औषधि जरूर ले सकते हैं। परंतु वे प्रोफेसर साहब तो सिर्फ चमत्कार द्वारा ही ईलाज ढूंढने आये थे इसलिये निराश होकर जाने लगे।
तभी पण्डित जी ने मुझे कहा कि मैं उनसे फीस के रूप में 1500 रुपये ले लूँ और फिर जाने दूँ। मैं भी चकित हो गया की ऐसा आज पण्डित जी को क्या हो गया है कि बिना कुछ किए धरे ही फीस के पैसे मांगने को कह रहे हैं और वो भी 1500 रुपये। लेकिन क्या करता मुझे मांगना ही पड़ा आखिर मेरे लिए मेरे लिए मेरे गुरु का आदेश जो था।
लेकिन मैं और भी चकित तब हो गया जब प्रोफेसर साहब ने पण्डित जी के श्री चरणों में खुद 2100 रुपये खुशी खुशी चढ़ा दिये और अत्यधिक खुशी के साथ सिर्फ आशीर्वाद की मांग की और फिर वापस जाने लगे।
यहाँ मैनें सोंचा की कल से मैं पण्डित जी का साथ छोड़कर चला जाऊंगा। ये तो एक ठगी है।
लेकिन एक बार फिर मुझे चकित रह जाना पड़ा तब जबकि अभी प्रोफेसर साहब करीब तीन किलोमीटर दूर जा चुके होंगे कि तभी अचानक पण्डित जी ध्यान में चले गये और उनके चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई। फिर करीब 10 मिनट के बाद जब वे ध्यान से बाहर आये तभी मुझसे बोले कि जरा प्रोफेसर साहब जी को वापस आने के लिए फोन करुँ और कहूँ कि आकर अपना ईलाज चमत्कारों के द्वारा करवा लें। मैं चकित था कि ये क्या पागलपन है। आखिर एक ऐसा व्यक्ति जो 40 किलोमीटर दूर से आया था उसे बिना कुछ खिलाये पिलाए भूखा प्यासा रखा और फिर 1500 रुपये भी ले लिए, किया धरा कुछ भी नहीं। और तो और वापस भी भेज दिया तीन किलोमीटर से ज्यादा और अब फिर वापस बुला रहे हैं। ये तो पण्डित जी जरूर पागल हो गये हैं।
लेकिन क्या करता फोन किया मैनें प्रोफेसर साहब जी को और वापस आने को कहा। मैं और भी चकित रह गया जबकि प्रोफेसर साहब बिना किसी गुस्से के ठीक है कहा और वापस आ गये।
रात होने लगी थी कि ठीक तभी पण्डित जी नें उनको बता दिया कि प्रोफेसर साहब आपको शुगर की बीमारी है। आपका ब्लड प्रेसर भी ज्यादा हो जाता है अक्सर। कुछ दिन पहले आप एक दुर्घटना के शिकार हो गये थे जिसमें आपके कन्धों में काफी चोटें आई थीं। आपकी बेटी शादीशुदा है लेकिन मानसिक परेशानी के कारण वो आपके ही साथ रहती है दरअसल उसे ससुराल में काफी टॉर्चर किया गया इसलिये अब वह अकेले ही अपना जीवन गुजारना चाहती है। दोबारा विवाह नहीं करना चाहती है। ये आपकी सबसे बड़ी चिंता का कारण है। कोई मुकदमा भी चल रहा है जमीन को लेकर। आपने अपनी एक किडनी भी दान में दे दी थी किसी को। आपके दोनों घुटनों में काफी दर्द होता है जो कि अब भी है।
अब तो प्रोफेसर साहब के साथ - साथ मैं भी घनघोर चकित रह गया।
फिर पण्डित जी ने उनके सिर पर अपना दायां हाँथ रखा और कुछ मंत्र पढ़ने लगे करीब 10 मिनट गुजर गये। और अन्त में जब पण्डित जी ने कहा कि जाओं अब आपका पूरा ईलाज हो गया । आपको आपकी इच्छानुसार चमत्कारी ईलाज प्राप्त हो गया।
और एकदम आश्चर्य जब प्रोफेसर साहब रोने लगे खुशी के आँसू थे उनकी आंखों में। बोले मैं अब ठीक हूं सच में। तभी उनकी बेटी का फोन आ गया वो बोली कि पापा अभी मेरे पति देव मुझे लेने आ गये हैं मैं उनके साथ जा रही हूं। मैं अब कुछ ठीक ठीक महसूस कर रही हूं अचानक। और आप कैसे हैं। प्रोफेसर साहब बोले कि बेटी पण्डित जी ने सब ठीक कर दिया। मैं अब चल पा रहा हूं मेरे घुटने में अब कोई दर्द नहीं है। हल्का महसूस कर रहा हूँ।
फिर पण्डित जी ने प्रोफेसर साहब को उनके 1500 रुपये भी वापस लौटा दिये। और खुस रहने का आशीर्वाद दिया। नास्ता लेकर प्रोफेसर साहब चले गये।
फिर मैनें पण्डित जी से पूंछ ही लिया कि ये क्या पण्डित जी आपने आज ऐसा पाप क्यों कर दिया।
पण्डित जी बोले कि कौन सा पाप कर दिया। मैने उनसे कहा कि पहले तो आपने उन्हें बिना अन्न जल के शाम तक भूखा प्यासा रखा फिर 1500 रुपए ले लिए फिर बिना कुछ किये धरे वापस भी भेज दिया।
और अब वापस बुलाकर सब ठीक भी कर दिया।
आखिर जब यही करना था तब फिर वापस क्यों भेजा था। लेकिन पण्डित जी मुस्कराकर बोले कि बेटा सुनील सच ये था कि पहले प्रोफेसर साहब चमत्कारी शक्तियों द्वारा ईलाज के योग्य नहीं थे। लेकिन अब थे इसलिये कर दिया उन्हें ठीक चमत्कारी शक्तियों द्वारा।
मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।
लेकिन तभी पण्डित जी नें मुझे बताया कि जब प्रोफेसर साहब नें 1500 रुपये दिये थे तब भी इनके चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी। अपनी एक किडनी किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सिर्फ इसलिए दान कर दी थी क्योकिं उसके पास दो छोटे-छोटे बच्चे थे। और आज इनके पास भी दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। इनका कोई भी रोग, कोई भी दर्द दवाई से ठीक नही होने वाला था। और तो और जब वापस जा रहे थे तब भी भगवान श्री राम जी का नाम जप रहे थे और अपनी गलती की क्षमा प्रार्थना कर रहे थे। इसलिए प्रभू की कृपा से देर ही से सही इस योग्य हो गये कि इन्हें चमत्कारी शक्तियों द्वारा लाभ दिया गया।
मेरी छोटी सी बुद्धि में तो कुछ आया नहीं अब अगर आपकी विशाल बुद्धि में कुछ आया हो तो बहुत ही अच्छा। लेकिन जो भी था सच सामने था इसलिए मानना पड़ा। आपको भी मानना चाहिये।
समाप्त
पण्डित जी अर्थात् डॉक्टर सन्तोष दूबे जी से आप निम्नलिखित पते और मोबाइल नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं।।।।।
डॉक्टर सन्तोष दूबे ( पण्डित जी )
BAMS (चिकित्सा), M.A. (मनोविज्ञान), Ph.D. (ज्योतिष, रत्न, वास्तु)
(परामर्शदाता एवं सलाहकार) Counsellor and Consultant
परिवार एवं रिश्ते, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार एवं व्यवसाय, टेक्नोलॉज़ी, विवाह, मनोरोग, गुप्तरोग, योग एवं योगा, शरीर ऊर्जा, साधना एवं सिद्धियां, आध्यात्म, प्राण - ऊर्जा, ज्योतिष - रत्न एवं वास्तु
सम्पर्क : बेलवाई, सुल्तानपुर, भारत
फोन : +91 - 9213032623
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